आईपीसी की धारा 378 आईपीसी की धारा 378 एक ऐसा कानू...
आईपीसी की धारा 378 आईपीसी की धारा 378 एक ऐसा कानून है जो भारत में चोरी के अपराध को परिभाषित करता है और दंडित करता है। चोरी किसी भी व्यक्ति की सहमति के बिना, उस संपत्ति को स्थानांतरित करके, किसी भी व्यक्ति के कब्जे से बेईमानी से लेने का कार्य है। चल संपत्ति का मतलब ऐसी संपत्ति है जिसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है, जैसे पैसा, आभूषण, कपड़े, जानवर आदि। चोरी की सजा तीन साल तक की कैद, या जुर्माना, या दोनों है। चोरी एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है, लेकिन यह उस व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है जिसके पास संपत्ति है। चोरी के कुछ उदाहरण हैं: - किसी दूसरे की ज़मीन पर लगे पेड़ को काटना और उनकी अनुमति के बिना उसे ले जाना। - किसी के कुत्ते को चारे से फुसलाना और उसकी अनुमति के बिना उसे अपने पीछे ले जाना। - किसी की अनुमति के बिना उसकी कार या बाइक चला देना। - किसी की जानकारी के बिना उसकी जेब या पर्स काटना। (1) भारतीय दंड संहिता की धारा 378. (2) आईपीसी धारा 378 - चोरी - सजा और जमानत (3) भारतीय दंड संहिता, 1860: चोरी और जबरन वसूली पर विशेष जोर।
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